पंचांग 31 दिसंबर 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 दिसंबर 2040 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय05:25 (1 जन॰)
चंद्रास्त15:42
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
संवत्सर:
रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 09:21 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 06:58 (1 जन॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 04:00 (2 जन॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 21:10 तक, फिर ज्येष्ठा 19:09 (1 जन॰) तक
योग
शूल 16:46 तक, फिर गण्ड 13:25 (1 जन॰) तक
करण
तैतिल 09:21 तक, फिर गर 20:15 तक, फिर वणिज 06:58 (1 जन॰) तक, फिर विष्टि 17:33 (1 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
  • राहु काल08:29 – 09:52
  • यमगंड11:14 – 12:37
  • गुलिक काल14:00 – 15:23

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:06 – 08:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:29 – 09:52
  • शुभ(शुभ)09:52 – 11:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:14 – 12:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:00
  • चर(सामान्य)14:00 – 15:23
  • लाभ(शुभ)15:23 – 16:46
  • अमृत(शुभ)16:46 – 18:08

रात

  • चर(सामान्य)18:08 – 19:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:46 – 21:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:23 – 23:00
  • लाभ(शुभ)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:37 (1 जन॰) – 02:15 (1 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:15 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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