पंचांग 30 दिसंबर 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 दिसंबर 2040 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय04:20 (31 दिस॰)
चंद्रास्त14:54
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
संवत्सर:
रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
तुला 16:48 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 11:02 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 09:22 (31 दिस॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 22:34 तक, फिर अनुराधा 21:10 (31 दिस॰) तक
योग
धृति 19:34 तक, फिर शूल 16:46 (31 दिस॰) तक
करण
बालव 11:02 तक, फिर कौलव 22:18 तक, फिर तैतिल 09:22 (31 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
  • राहु काल16:45 – 18:08
  • यमगंड12:37 – 14:00
  • गुलिक काल15:22 – 16:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:28
  • चर(सामान्य)08:28 – 09:51
  • लाभ(शुभ)09:51 – 11:14
  • अमृत(शुभ)11:14 – 12:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:00
  • शुभ(शुभ)14:00 – 15:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:45
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:08

रात

  • शुभ(शुभ)18:08 – 19:45
  • अमृत(शुभ)19:45 – 21:22
  • चर(सामान्य)21:22 – 23:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:37 (31 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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