पंचांग 16 दिसंबर 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 दिसंबर 2027 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय20:56
चंद्रास्त09:24
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 13:22 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 10:34 (17 दिस॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:13 तक, फिर पुष्य 07:07 (17 दिस॰) तक
योग
ब्रह्म 09:42 तक, फिर इन्द्र 06:11 (17 दिस॰) तक, फिर वैधृति 02:47 (18 दिस॰) तक
करण
विष्टि 13:22 तक, फिर बव 23:57 तक, फिर बालव 10:34 (17 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51
  • राहु काल13:52 – 15:15
  • यमगंड06:59 – 08:21
  • गुलिक काल09:44 – 11:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:59 – 08:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:21 – 09:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:44 – 11:07
  • चर(सामान्य)11:07 – 12:29
  • लाभ(शुभ)12:29 – 13:52
  • अमृत(शुभ)13:52 – 15:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:38
  • शुभ(शुभ)16:38 – 18:00

रात

  • अमृत(शुभ)18:00 – 19:38
  • चर(सामान्य)19:38 – 21:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:15 – 22:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:30 (17 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)00:30 (17 दिस॰) – 02:07 (17 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:07 (17 दिस॰) – 03:44 (17 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)03:44 (17 दिस॰) – 05:22 (17 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)05:22 (17 दिस॰) – 06:59 (17 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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