पंचांग 18 फ़रवरी 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 फ़रवरी 2027 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय15:56
चंद्रास्त05:30 (19 फ़र॰)
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 15:42 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल द्वादशी 14:28 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 11:14 (19 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 21:06 तक, फिर पुष्य 18:36 (19 फ़र॰) तक
- योग
- आयुष्मान 22:50 तक, फिर सौभाग्य 18:59 (19 फ़र॰) तक
- करण
- बालव 14:28 तक, फिर कौलव 00:52 (19 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 11:14 (19 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल14:15 – 15:42
- यमगंड07:00 – 08:27
- गुलिक काल09:54 – 11:21
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)07:00 – 08:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:27 – 09:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:54 – 11:21
- चर(सामान्य)11:21 – 12:48
- लाभ(शुभ)12:48 – 14:15
- अमृत(शुभ)14:15 – 15:42
- काल(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:09
- शुभ(शुभ)17:09 – 18:36
रात
- अमृत(शुभ)18:36 – 20:09
- चर(सामान्य)20:09 – 21:42
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:15
- काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (19 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)00:48 (19 फ़र॰) – 02:21 (19 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:21 (19 फ़र॰) – 03:54 (19 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)03:54 (19 फ़र॰) – 05:27 (19 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)05:27 (19 फ़र॰) – 07:00 (19 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें