पंचांग 3 फ़रवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 फ़रवरी 2027 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय05:26 (4 फ़र॰)
चंद्रास्त15:43
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 13:50 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 16:31 (4 फ़र॰) तक
नक्षत्र
मूल 12:26 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 15:32 (4 फ़र॰) तक
योग
हर्षण 18:44 तक, फिर वज्र 19:42 (4 फ़र॰) तक
करण
तैतिल 13:50 तक, फिर गर 03:11 (4 फ़र॰) तक, फिर वणिज 16:31 (4 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:48 – 14:13
  • यमगंड08:32 – 09:57
  • गुलिक काल11:23 – 12:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:07 – 08:32
  • अमृत(शुभ)08:32 – 09:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:23
  • शुभ(शुभ)11:23 – 12:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:38
  • चर(सामान्य)15:38 – 17:04
  • लाभ(शुभ)17:04 – 18:29

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:29 – 20:03
  • शुभ(शुभ)20:03 – 21:38
  • अमृत(शुभ)21:38 – 23:13
  • चर(सामान्य)23:13 – 00:48 (4 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (4 फ़र॰) – 02:22 (4 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (4 फ़र॰) – 03:57 (4 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:57 (4 फ़र॰) – 05:32 (4 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:32 (4 फ़र॰) – 07:07 (4 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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