पंचांग 11 जनवरी 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 जनवरी 2025 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय15:41
चंद्रास्त05:37 (12 जन॰)
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- वृषभ 23:55 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल द्वादशी 08:22 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 06:34 (12 जन॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 05:03 (13 जन॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 12:29 तक, फिर मृगशीर्ष 11:24 (12 जन॰) तक
- योग
- शुक्ल 11:48 तक, फिर ब्रह्म 09:09 (12 जन॰) तक
- करण
- बालव 08:22 तक, फिर कौलव 19:26 तक, फिर तैतिल 06:34 (12 जन॰) तक, फिर गर 17:46 (12 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:04
- राहु काल09:55 – 11:19
- यमगंड14:05 – 15:29
- गुलिक काल07:09 – 08:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:32
- शुभ(शुभ)08:32 – 09:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:19 – 12:42
- चर(सामान्य)12:42 – 14:05
- लाभ(शुभ)14:05 – 15:29
- अमृत(शुभ)15:29 – 16:52
- काल(वर्जित (परंपरा))16:52 – 18:15
रात
- लाभ(शुभ)18:15 – 19:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:52 – 21:29
- शुभ(शुभ)21:29 – 23:05
- अमृत(शुभ)23:05 – 00:42 (12 जन॰)
- चर(सामान्य)00:42 (12 जन॰) – 02:19 (12 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:19 (12 जन॰) – 03:56 (12 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:56 (12 जन॰) – 05:32 (12 जन॰)
- लाभ(शुभ)05:32 (12 जन॰) – 07:09 (12 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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