धनु राशि (Sagittarius)
राशि-चक्र की 9वीं राशि · निरयन 240°–270°
- स्वामी ग्रह
- गुरु
- तत्व
- अग्नि
- स्वभाव (गति)
- द्विस्वभाव
- अध्ययन-संकेत
- अर्थ, विस्तार
- राशि-चक्र में स्थान
- 240° से 270° (मेष 0° से गिनकर)
प्रतीकात्मक दिशा और पठन-प्रश्न
प्रमुख प्रतीकात्मक दिशा: अर्थ, सिद्धांत, विस्तार
पठन का उपयोगी प्रश्न: विश्वास को अनुभव और प्रमाण से कैसे मिलाएं?
राशि ग्रह की अभिव्यक्ति-शैली बताती है; अकेली राशि से व्यक्तित्व या घटना तय नहीं होती। ग्रह, भाव, राशि-स्वामी, दृष्टि और दशा साथ देखें।
धनु राशि में नक्षत्र और पद
| नक्षत्र | पद | धनु में अंश |
|---|---|---|
| मूल | 1, 2, 3, 4 | 0°00′ – 13°20′ |
| पूर्वाषाढ़ा | 1, 2, 3, 4 | 13°20′ – 26°40′ |
| उत्तराषाढ़ा | 1 | 26°40′ – 30°00′ |
हर राशि 30° = सवा दो नक्षत्र = 9 पद (हर पद 3°20′)।
पुस्तक में कहाँ पढ़ें
- बारह राशियों की अध्ययन-प्रोफाइलपृष्ठ 49
- अध्याय 2 · बारह राशियाँ: तत्व, स्वभाव और स्वामीपृष्ठ 10
- अध्याय 5 · लग्न और उत्तर भारतीय कुंडली की रचनापृष्ठ 19
पृष्ठ-संख्या ‘व्यावहारिक कुंडली विज्ञान’ (अष्टम संस्करण, 166 पृष्ठ) की है।
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यह पुस्तक शैक्षिक अध्ययन-सामग्री है। इसमें दी गई ज्योतिषीय व्याख्याएँ पारंपरिक और सांस्कृतिक अध्ययन के लिए हैं; वे निश्चित भविष्यवाणी, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।