पंचांग 26 मार्च 2055
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 मार्च 2055 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय06:01 (27 मार्च)
चंद्रास्त17:21
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1976 · विक्रम (चैत्रादि) 2111
- संवत्सर:
- भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 07:20 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 10:00 (27 मार्च) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 13:56 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 17:01 (27 मार्च) तक
- योग
- शुभ 00:29 (27 मार्च) तक, फिर शुक्ल 01:27 (28 मार्च) तक
- करण
- वणिज 07:20 तक, फिर विष्टि 20:41 तक, फिर शकुनि 10:00 (27 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
- राहु काल11:08 – 12:40
- यमगंड15:43 – 17:15
- गुलिक काल08:05 – 09:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:33 – 08:05
- लाभ(शुभ)08:05 – 09:37
- अमृत(शुभ)09:37 – 11:08
- काल(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:40
- शुभ(शुभ)12:40 – 14:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- चर(सामान्य)17:15 – 18:46
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:15
- काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (27 मार्च)
- शुभ(शुभ)00:39 (27 मार्च) – 02:08 (27 मार्च)
- अमृत(शुभ)02:08 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
- चर(सामान्य)03:36 (27 मार्च) – 05:04 (27 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:04 (27 मार्च) – 06:33 (27 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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