पंचांग 17 मार्च 2055
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 मार्च 2055 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:41
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय22:58
चंद्रास्त09:51
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1976 · विक्रम (चैत्रादि) 2111
- संवत्सर:
- भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- तुला 18:27 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 22:40 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 21:17 (18 मार्च) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 00:10 (18 मार्च) तक, फिर अनुराधा 23:33 (18 मार्च) तक
- योग
- हर्षण 01:28 (18 मार्च) तक, फिर वज्र 23:17 (18 मार्च) तक
- करण
- कौलव 11:39 तक, फिर तैतिल 22:40 तक, फिर गर 09:53 (18 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:43 – 14:13
- यमगंड08:11 – 09:42
- गुलिक काल11:12 – 12:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:41 – 08:11
- अमृत(शुभ)08:11 – 09:42
- काल(वर्जित (परंपरा))09:42 – 11:12
- शुभ(शुभ)11:12 – 12:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:14
- लाभ(शुभ)17:14 – 18:44
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:14
- शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:13
- चर(सामान्य)23:13 – 00:42 (18 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:42 (18 मार्च) – 02:12 (18 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:12 (18 मार्च) – 03:41 (18 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:41 (18 मार्च) – 05:11 (18 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:11 (18 मार्च) – 06:40 (18 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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