पंचांग 12 जुलाई 2045

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 जुलाई 2045 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय04:31 (13 जुल॰)
चंद्रास्त17:22
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ 18:58 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:41 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 19:28 (13 जुल॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:57 तक, फिर मृगशीर्ष 05:51 (13 जुल॰) तक, फिर आर्द्रा 03:20 (14 जुल॰) तक
योग
वृद्धि 19:48 तक, फिर ध्रुव 16:09 (13 जुल॰) तक
करण
गर 12:07 तक, फिर वणिज 22:41 तक, फिर विष्टि 09:07 (13 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:40 – 14:18
  • यमगंड07:44 – 09:22
  • गुलिक काल11:01 – 12:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:05 – 07:44
  • अमृत(शुभ)07:44 – 09:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:22 – 11:01
  • शुभ(शुभ)11:01 – 12:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • चर(सामान्य)15:57 – 17:36
  • लाभ(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • शुभ(शुभ)20:36 – 21:57
  • अमृत(शुभ)21:57 – 23:19
  • चर(सामान्य)23:19 – 00:40 (13 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (13 जुल॰) – 02:01 (13 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (13 जुल॰) – 03:23 (13 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:23 (13 जुल॰) – 04:44 (13 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:44 (13 जुल॰) – 06:05 (13 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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