पंचांग 28 जनवरी 2045
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 जनवरी 2045 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:26
चंद्रोदय13:36
चंद्रास्त03:27 (29 जन॰)
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 19:12 तक, फिर शुक्ल एकादशी 16:37 (29 जन॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 11:31 तक, फिर रोहिणी 09:50 (29 जन॰) तक
- योग
- ब्रह्म 01:49 (29 जन॰) तक, फिर इन्द्र 22:21 (29 जन॰) तक
- करण
- तैतिल 08:16 तक, फिर गर 19:12 तक, फिर वणिज 05:59 (29 जन॰) तक, फिर विष्टि 16:37 (29 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:10
- राहु काल09:58 – 11:22
- यमगंड14:12 – 15:36
- गुलिक काल07:08 – 08:33
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))07:08 – 08:33
- शुभ(शुभ)08:33 – 09:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:58 – 11:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:47
- चर(सामान्य)12:47 – 14:12
- लाभ(शुभ)14:12 – 15:36
- अमृत(शुभ)15:36 – 17:01
- काल(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:26
रात
- लाभ(शुभ)18:26 – 20:01
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:01 – 21:36
- शुभ(शुभ)21:36 – 23:12
- अमृत(शुभ)23:12 – 00:47 (29 जन॰)
- चर(सामान्य)00:47 (29 जन॰) – 02:22 (29 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:22 (29 जन॰) – 03:58 (29 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:58 (29 जन॰) – 05:33 (29 जन॰)
- लाभ(शुभ)05:33 (29 जन॰) – 07:08 (29 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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