पंचांग 26 दिसंबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 दिसंबर 2044 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय11:37
चंद्रास्त23:54
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कुंभ 20:27 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 07:00 (27 दिस॰) तक, फिर शुक्ल अष्टमी 07:46 (28 दिस॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 02:55 (27 दिस॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 04:21 (28 दिस॰) तक
योग
व्यतीपात 06:36 (27 दिस॰) तक, फिर वरीयान 06:03 (28 दिस॰) तक
करण
गर 18:19 तक, फिर वणिज 07:00 (27 दिस॰) तक, फिर विष्टि 19:29 (27 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 12:57
  • राहु काल08:27 – 09:49
  • यमगंड11:12 – 12:35
  • गुलिक काल13:57 – 15:20

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:04 – 08:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:27 – 09:49
  • शुभ(शुभ)09:49 – 11:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 13:57
  • चर(सामान्य)13:57 – 15:20
  • लाभ(शुभ)15:20 – 16:43
  • अमृत(शुभ)16:43 – 18:06

रात

  • चर(सामान्य)18:06 – 19:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:20
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:20 – 22:58
  • लाभ(शुभ)22:58 – 00:35 (27 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:35 (27 दिस॰) – 02:12 (27 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)02:12 (27 दिस॰) – 03:50 (27 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)03:50 (27 दिस॰) – 05:27 (27 दिस॰)
  • चर(सामान्य)05:27 (27 दिस॰) – 07:04 (27 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें