पंचांग 18 दिसंबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 दिसंबर 2044 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय06:57 (19 दिस॰)
चंद्रास्त17:05
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:18 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 14:23 (19 दिस॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 07:10 (19 दिस॰) तक
योग
शूल 01:06 (19 दिस॰) तक, फिर गण्ड 01:40 (20 दिस॰) तक
करण
शकुनि 12:18 तक, फिर चतुष्पद 01:18 (19 दिस॰) तक, फिर नाग 14:23 (19 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:53
  • राहु काल16:39 – 18:01
  • यमगंड12:31 – 13:53
  • गुलिक काल15:16 – 16:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:00 – 08:23
  • चर(सामान्य)08:23 – 09:45
  • लाभ(शुभ)09:45 – 11:08
  • अमृत(शुभ)11:08 – 12:31
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:31 – 13:53
  • शुभ(शुभ)13:53 – 15:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:16 – 16:39
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:39 – 18:01

रात

  • शुभ(शुभ)18:01 – 19:39
  • अमृत(शुभ)19:39 – 21:16
  • चर(सामान्य)21:16 – 22:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:31 (19 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:31 (19 दिस॰) – 02:08 (19 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:08 (19 दिस॰) – 03:46 (19 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:46 (19 दिस॰) – 05:23 (19 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:23 (19 दिस॰) – 07:01 (19 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें