पंचांग 4 दिसंबर 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 दिसंबर 2044 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय17:14
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 08:18 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 05:03 (5 दिस॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 01:35 (6 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 14:36 तक, फिर रोहिणी 12:00 (5 दिस॰) तक
- योग
- शिव 12:01 तक, फिर सिद्ध 08:06 (5 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 08:18 तक, फिर विष्टि 18:43 तक, फिर बव 05:03 (5 दिस॰) तक, फिर बालव 15:20 (5 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
- राहु काल16:34 – 17:57
- यमगंड12:24 – 13:47
- गुलिक काल15:10 – 16:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:52 – 08:15
- चर(सामान्य)08:15 – 09:38
- लाभ(शुभ)09:38 – 11:01
- अमृत(शुभ)11:01 – 12:24
- काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:47
- शुभ(शुभ)13:47 – 15:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 17:57
रात
- शुभ(शुभ)17:57 – 19:34
- अमृत(शुभ)19:34 – 21:11
- चर(सामान्य)21:11 – 22:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:25 (5 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:25 (5 दिस॰) – 02:02 (5 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:02 (5 दिस॰) – 03:39 (5 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:39 (5 दिस॰) – 05:16 (5 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:16 (5 दिस॰) – 06:53 (5 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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