पंचांग 25 अक्टूबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 अक्टूबर 2044 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय10:19
चंद्रास्त21:19
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृश्चिक 16:43 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 08:30 तक, फिर शुक्ल पंचमी 10:38 (26 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 16:43 तक, फिर मूल 19:28 (26 अक्टू॰) तक
योग
शोभन 13:53 तक, फिर अतिगण्ड 14:32 (26 अक्टू॰) तक
करण
विष्टि 08:30 तक, फिर बव 21:31 तक, फिर बालव 10:38 (26 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल15:11 – 16:38
  • यमगंड09:25 – 10:51
  • गुलिक काल12:18 – 13:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:58
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:51
  • लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
  • अमृत(शुभ)12:18 – 13:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:11
  • शुभ(शुभ)15:11 – 16:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:05

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:38
  • लाभ(शुभ)19:38 – 21:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:45
  • शुभ(शुभ)22:45 – 00:18 (26 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:18 (26 अक्टू॰) – 01:51 (26 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:51 (26 अक्टू॰) – 03:25 (26 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 अक्टू॰) – 04:58 (26 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:58 (26 अक्टू॰) – 06:32 (26 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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