पंचांग 25 सितंबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 सितंबर 2044 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय09:45
चंद्रास्त21:01
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
तुला 21:30 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 14:45 तक, फिर शुक्ल पंचमी 15:54 (26 सित॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 03:55 (26 सित॰) तक, फिर अनुराधा 05:58 (27 सित॰) तक
योग
विष्कम्भ 05:42 (26 सित॰) तक, फिर प्रीति 05:49 (27 सित॰) तक
करण
विष्टि 14:45 तक, फिर बव 03:15 (26 सित॰) तक, फिर बालव 15:54 (26 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50
  • राहु काल16:57 – 18:27
  • यमगंड12:25 – 13:56
  • गुलिक काल15:26 – 16:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:55
  • अमृत(शुभ)10:55 – 12:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:56
  • शुभ(शुभ)13:56 – 15:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:26 – 16:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:27

रात

  • शुभ(शुभ)18:27 – 19:57
  • अमृत(शुभ)19:57 – 21:26
  • चर(सामान्य)21:26 – 22:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:56 – 00:26 (26 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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