पंचांग 1 अप्रैल 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 अप्रैल 2044 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय08:21
चंद्रास्त21:56
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मेष 19:02 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 08:19 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 05:43 (2 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:08 (3 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- भरणी 13:30 तक, फिर कृत्तिका 11:39 (2 अप्रैल) तक
- योग
- विष्कम्भ 11:47 तक, फिर प्रीति 08:31 (2 अप्रैल) तक
- करण
- गर 08:19 तक, फिर वणिज 19:02 तक, फिर विष्टि 05:43 (2 अप्रैल) तक, फिर बव 16:25 (2 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
- राहु काल11:05 – 12:38
- यमगंड15:43 – 17:15
- गुलिक काल08:00 – 09:33
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:28 – 08:00
- लाभ(शुभ)08:00 – 09:33
- अमृत(शुभ)09:33 – 11:05
- काल(वर्जित (परंपरा))11:05 – 12:38
- शुभ(शुभ)12:38 – 14:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- चर(सामान्य)17:15 – 18:48
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:48 – 20:15
- काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (2 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)00:38 (2 अप्रैल) – 02:05 (2 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)02:05 (2 अप्रैल) – 03:32 (2 अप्रैल)
- चर(सामान्य)03:32 (2 अप्रैल) – 05:00 (2 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:00 (2 अप्रैल) – 06:27 (2 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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