पंचांग 28 मार्च 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 मार्च 2044 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय06:16 (29 मार्च)
चंद्रास्त17:56
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1965 · विक्रम (चैत्रादि) 2100
- संवत्सर:
- रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कुंभ 12:54 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 16:19 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 14:55 (29 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 18:48 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:02 (29 मार्च) तक
- योग
- शुक्ल 23:07 तक, फिर ब्रह्म 20:44 (29 मार्च) तक
- करण
- शकुनि 16:19 तक, फिर चतुष्पद 03:41 (29 मार्च) तक, फिर नाग 14:55 (29 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
- राहु काल08:03 – 09:35
- यमगंड11:07 – 12:39
- गुलिक काल14:11 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:31 – 08:03
- काल(वर्जित (परंपरा))08:03 – 09:35
- शुभ(शुभ)09:35 – 11:07
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:39
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:11
- चर(सामान्य)14:11 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:15
- अमृत(शुभ)17:15 – 18:47
रात
- चर(सामान्य)18:47 – 20:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:11
- लाभ(शुभ)23:11 – 00:39 (29 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:39 (29 मार्च) – 02:07 (29 मार्च)
- शुभ(शुभ)02:07 (29 मार्च) – 03:35 (29 मार्च)
- अमृत(शुभ)03:35 (29 मार्च) – 05:03 (29 मार्च)
- चर(सामान्य)05:03 (29 मार्च) – 06:30 (29 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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