पंचांग 20 सितंबर 2043

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 सितंबर 2043 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय19:28
चंद्रास्त07:21
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1965 · विक्रम (चैत्रादि) 2100
संवत्सर:
रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 02:22 (21 सित॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 23:37 (21 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 08:40 तक, फिर रेवती 06:48 (21 सित॰) तक
योग
वृद्धि 20:12 तक, फिर ध्रुव 16:51 (21 सित॰) तक
करण
तैतिल 15:42 तक, फिर गर 02:22 (21 सित॰) तक, फिर वणिज 13:01 (21 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
  • राहु काल17:01 – 18:32
  • यमगंड12:27 – 13:59
  • गुलिक काल15:30 – 17:01

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:56
  • अमृत(शुभ)10:56 – 12:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:59
  • शुभ(शुभ)13:59 – 15:30
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:30 – 17:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:32

रात

  • शुभ(शुभ)18:32 – 20:01
  • अमृत(शुभ)20:01 – 21:30
  • चर(सामान्य)21:30 – 22:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:59 – 00:28 (21 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:28 (21 सित॰) – 01:56 (21 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:56 (21 सित॰) – 03:25 (21 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (21 सित॰) – 04:54 (21 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (21 सित॰) – 06:23 (21 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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