पंचांग 27 फ़रवरी 2043

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 फ़रवरी 2043 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:55
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय21:35
चंद्रास्त08:52
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1964 · विक्रम (चैत्रादि) 2099
संवत्सर:
दुंदुभी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कन्या 03:48 (28 फ़र॰) तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 07:33 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 09:52 (28 फ़र॰) तक
नक्षत्र
हस्त 14:25 तक, फिर चित्रा 17:16 (28 फ़र॰) तक
योग
गण्ड 01:10 (28 फ़र॰) तक, फिर वृद्धि 02:01 (1 मार्च) तक
करण
विष्टि 07:33 तक, फिर बव 20:40 तक, फिर बालव 09:52 (28 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
  • राहु काल11:19 – 12:47
  • यमगंड15:43 – 17:11
  • गुलिक काल08:23 – 09:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:55 – 08:23
  • लाभ(शुभ)08:23 – 09:51
  • अमृत(शुभ)09:51 – 11:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:19 – 12:47
  • शुभ(शुभ)12:47 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:11
  • चर(सामान्य)17:11 – 18:39

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:11 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:47 (28 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:47 (28 फ़र॰) – 02:18 (28 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:18 (28 फ़र॰) – 03:50 (28 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:50 (28 फ़र॰) – 05:22 (28 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:22 (28 फ़र॰) – 06:54 (28 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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