पंचांग 15 जनवरी 2043
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 जनवरी 2043 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय10:12
चंद्रास्त22:15
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1964 · विक्रम (चैत्रादि) 2099
- संवत्सर:
- दुंदुभी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- कुंभ 04:45 (16 जन॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 08:37 तक, फिर शुक्ल पंचमी 07:03 (16 जन॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 05:21 (17 जन॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 11:25 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 10:30 (16 जन॰) तक
- योग
- वरीयान 02:45 (16 जन॰) तक, फिर परिघ 00:11 (17 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 08:37 तक, फिर बव 19:51 तक, फिर बालव 07:03 (16 जन॰) तक, फिर कौलव 18:13 (16 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:06
- राहु काल14:07 – 15:30
- यमगंड07:09 – 08:33
- गुलिक काल09:56 – 11:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)07:09 – 08:33
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:56 – 11:20
- चर(सामान्य)11:20 – 12:43
- लाभ(शुभ)12:43 – 14:07
- अमृत(शुभ)14:07 – 15:30
- काल(वर्जित (परंपरा))15:30 – 16:54
- शुभ(शुभ)16:54 – 18:18
रात
- अमृत(शुभ)18:18 – 19:54
- चर(सामान्य)19:54 – 21:30
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:30 – 23:07
- काल(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:43 (16 जन॰)
- लाभ(शुभ)00:43 (16 जन॰) – 02:20 (16 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:20 (16 जन॰) – 03:56 (16 जन॰)
- शुभ(शुभ)03:56 (16 जन॰) – 05:33 (16 जन॰)
- अमृत(शुभ)05:33 (16 जन॰) – 07:09 (16 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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