पंचांग 5 दिसंबर 2042

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 दिसंबर 2042 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय01:35 (6 दिस॰)
चंद्रास्त13:22
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1964 · विक्रम (चैत्रादि) 2099
संवत्सर:
दुंदुभी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
सिंह 14:53 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 06:05 (6 दिस॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 08:46 (7 दिस॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 08:12 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 11:03 (6 दिस॰) तक
योग
प्रीति 05:17 (6 दिस॰) तक, फिर आयुष्मान 06:14 (7 दिस॰) तक
करण
तैतिल 16:52 तक, फिर गर 06:05 (6 दिस॰) तक, फिर वणिज 19:24 (6 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:47
  • राहु काल11:01 – 12:25
  • यमगंड15:11 – 16:34
  • गुलिक काल08:15 – 09:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:52 – 08:15
  • लाभ(शुभ)08:15 – 09:38
  • अमृत(शुभ)09:38 – 11:01
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:25
  • शुभ(शुभ)12:25 – 13:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:34
  • चर(सामान्य)16:34 – 17:57

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:34 – 21:11
  • लाभ(शुभ)21:11 – 22:48
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:25 (6 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:25 (6 दिस॰) – 02:02 (6 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:02 (6 दिस॰) – 03:39 (6 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:39 (6 दिस॰) – 05:16 (6 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:16 (6 दिस॰) – 06:53 (6 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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