पंचांग 21 मई 2042
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 मई 2042 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:03
चंद्रोदय07:23
चंद्रास्त21:17
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1964 · विक्रम (चैत्रादि) 2099
- संवत्सर:
- दुंदुभी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- वृषभ 11:45 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 11:35 तक, फिर शुक्ल तृतीया 09:58 (22 मई) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 23:15 तक, फिर आर्द्रा 22:45 (22 मई) तक
- योग
- सुकर्मा 07:39 तक, फिर धृति 05:11 (22 मई) तक, फिर शूल 03:15 (23 मई) तक
- करण
- कौलव 11:35 तक, फिर तैतिल 22:42 तक, फिर गर 09:58 (22 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:31 – 14:09
- यमगंड07:37 – 09:15
- गुलिक काल10:53 – 12:31
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)05:59 – 07:37
- अमृत(शुभ)07:37 – 09:15
- काल(वर्जित (परंपरा))09:15 – 10:53
- शुभ(शुभ)10:53 – 12:31
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:47
- चर(सामान्य)15:47 – 17:25
- लाभ(शुभ)17:25 – 19:03
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:03 – 20:25
- शुभ(शुभ)20:25 – 21:47
- अमृत(शुभ)21:47 – 23:09
- चर(सामान्य)23:09 – 00:31 (22 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (22 मई) – 01:53 (22 मई)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (22 मई) – 03:15 (22 मई)
- लाभ(शुभ)03:15 (22 मई) – 04:36 (22 मई)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:36 (22 मई) – 05:58 (22 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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