पंचांग 25 दिसंबर 2041

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 दिसंबर 2041 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय08:57
चंद्रास्त20:11
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
संवत्सर:
दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:45 तक, फिर शुक्ल तृतीया 07:26 (26 दिस॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 21:01 तक, फिर श्रवण 19:20 (26 दिस॰) तक
योग
व्याघात 02:36 (26 दिस॰) तक, फिर हर्षण 23:25 (26 दिस॰) तक
करण
कौलव 09:45 तक, फिर तैतिल 20:37 तक, फिर गर 07:26 (26 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 12:56परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:34 – 13:57
  • यमगंड08:26 – 09:49
  • गुलिक काल11:12 – 12:34

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:03 – 08:26
  • अमृत(शुभ)08:26 – 09:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:49 – 11:12
  • शुभ(शुभ)11:12 – 12:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 13:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:20
  • चर(सामान्य)15:20 – 16:42
  • लाभ(शुभ)16:42 – 18:05

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:42
  • शुभ(शुभ)19:42 – 21:20
  • अमृत(शुभ)21:20 – 22:57
  • चर(सामान्य)22:57 – 00:34 (26 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (26 दिस॰) – 02:12 (26 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:12 (26 दिस॰) – 03:49 (26 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:49 (26 दिस॰) – 05:27 (26 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:27 (26 दिस॰) – 07:04 (26 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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