पंचांग 3 दिसंबर 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 दिसंबर 2041 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:51
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय14:37
चंद्रास्त03:17 (4 दिस॰)
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- मीन 06:18 (4 दिस॰) तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 08:01 तक, फिर शुक्ल एकादशी 05:55 (4 दिस॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 03:55 (5 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 07:42 तक, फिर रेवती 06:18 (4 दिस॰) तक, फिर अश्विनी 04:59 (5 दिस॰) तक
- योग
- सिद्धि 07:26 तक, फिर व्यतीपात 04:31 (4 दिस॰) तक, फिर वरीयान 01:40 (5 दिस॰) तक
- करण
- गर 08:01 तक, फिर वणिज 18:58 तक, फिर विष्टि 05:55 (4 दिस॰) तक, फिर बव 16:54 (4 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
- राहु काल15:10 – 16:33
- यमगंड09:38 – 11:01
- गुलिक काल12:24 – 13:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:51 – 08:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:38
- चर(सामान्य)09:38 – 11:01
- लाभ(शुभ)11:01 – 12:24
- अमृत(शुभ)12:24 – 13:47
- काल(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:10
- शुभ(शुभ)15:10 – 16:33
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:56
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
- लाभ(शुभ)19:33 – 21:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:47
- शुभ(शुभ)22:47 – 00:24 (4 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:24 (4 दिस॰) – 02:01 (4 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:01 (4 दिस॰) – 03:38 (4 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:38 (4 दिस॰) – 05:15 (4 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:15 (4 दिस॰) – 06:52 (4 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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