पंचांग 22 अप्रैल 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 अप्रैल 2041 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:12
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय00:42 (23 अप्रैल)
चंद्रास्त10:49
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 13:49 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 11:56 (23 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 01:02 (23 अप्रैल) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 23:45 (23 अप्रैल) तक
- योग
- शिव 11:11 तक, फिर सिद्ध 08:36 (23 अप्रैल) तक
- करण
- वणिज 13:49 तक, फिर विष्टि 00:55 (23 अप्रैल) तक, फिर बव 11:56 (23 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
- राहु काल07:47 – 09:22
- यमगंड10:58 – 12:33
- गुलिक काल14:08 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:12 – 07:47
- काल(वर्जित (परंपरा))07:47 – 09:22
- शुभ(शुभ)09:22 – 10:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
- चर(सामान्य)14:08 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:18
- अमृत(शुभ)17:18 – 18:53
रात
- चर(सामान्य)18:53 – 20:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:18 – 21:43
- काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
- लाभ(शुभ)23:07 – 00:32 (23 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (23 अप्रैल) – 01:57 (23 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)01:57 (23 अप्रैल) – 03:22 (23 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)03:22 (23 अप्रैल) – 04:47 (23 अप्रैल)
- चर(सामान्य)04:47 (23 अप्रैल) – 06:12 (23 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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