पंचांग 18 सितंबर 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 सितंबर 2040 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय17:05
चंद्रास्त04:44 (19 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
संवत्सर:
रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मकर 15:37 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 08:06 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 05:00 (19 सित॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 01:58 (20 सित॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 02:27 (19 सित॰) तक, फिर शतभिषा 00:12 (20 सित॰) तक
योग
सुकर्मा 18:07 तक, फिर धृति 14:28 (19 सित॰) तक
करण
बालव 08:06 तक, फिर कौलव 18:33 तक, फिर तैतिल 05:00 (19 सित॰) तक, फिर गर 15:28 (19 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:52
  • राहु काल15:31 – 17:02
  • यमगंड09:25 – 10:57
  • गुलिक काल12:28 – 13:59

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:57
  • लाभ(शुभ)10:57 – 12:28
  • अमृत(शुभ)12:28 – 13:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:31
  • शुभ(शुभ)15:31 – 17:02
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:02 – 18:33

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:33 – 20:02
  • लाभ(शुभ)20:02 – 21:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:31 – 22:59
  • शुभ(शुभ)22:59 – 00:28 (19 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:28 (19 सित॰) – 01:57 (19 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:57 (19 सित॰) – 03:25 (19 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (19 सित॰) – 04:54 (19 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (19 सित॰) – 06:23 (19 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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