पंचांग 14 फ़रवरी 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 फ़रवरी 2040 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय08:28
चंद्रास्त20:27
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
संवत्सर:
सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कुंभ 23:26 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 14:40 तक, फिर शुक्ल तृतीया 12:55 (15 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 05:10 (15 फ़र॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 04:34 (16 फ़र॰) तक
योग
शिव 16:09 तक, फिर सिद्ध 13:34 (15 फ़र॰) तक
करण
कौलव 14:40 तक, फिर तैतिल 01:42 (15 फ़र॰) तक, फिर गर 12:55 (15 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल15:41 – 17:08
  • यमगंड09:55 – 11:22
  • गुलिक काल12:48 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:03 – 08:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:29 – 09:55
  • चर(सामान्य)09:55 – 11:22
  • लाभ(शुभ)11:22 – 12:48
  • अमृत(शुभ)12:48 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
  • शुभ(शुभ)15:41 – 17:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:34

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:34 – 20:08
  • लाभ(शुभ)20:08 – 21:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:41 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:48 (15 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)00:48 (15 फ़र॰) – 02:22 (15 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)02:22 (15 फ़र॰) – 03:55 (15 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:55 (15 फ़र॰) – 05:29 (15 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:29 (15 फ़र॰) – 07:02 (15 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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