पंचांग 21 अगस्त 2039

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अगस्त 2039 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय07:26
चंद्रास्त20:16
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
संवत्सर:
सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
सिंह 04:37 (22 अग॰) तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:27 (22 अग॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 00:24 (23 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 22:39 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 22:23 (22 अग॰) तक
योग
शिव 15:45 तक, फिर सिद्ध 14:00 (22 अग॰) तक
करण
बालव 13:50 तक, फिर कौलव 01:27 (22 अग॰) तक, फिर तैतिल 12:58 (22 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
  • राहु काल17:22 – 18:57
  • यमगंड12:37 – 14:12
  • गुलिक काल15:47 – 17:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
  • चर(सामान्य)07:52 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:02
  • अमृत(शुभ)11:02 – 12:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
  • शुभ(शुभ)14:12 – 15:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:47 – 17:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:22 – 18:57

रात

  • शुभ(शुभ)18:57 – 20:22
  • अमृत(शुभ)20:22 – 21:47
  • चर(सामान्य)21:47 – 23:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:37 (22 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:52 (22 अग॰) – 06:17 (22 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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