पंचांग 24 दिसंबर 2038

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 दिसंबर 2038 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय06:05 (25 दिस॰)
चंद्रास्त16:31
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1960 · विक्रम (चैत्रादि) 2095
संवत्सर:
कालयुक्त (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 12:47 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 09:35 (25 दिस॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 16:50 तक, फिर ज्येष्ठा 14:22 (25 दिस॰) तक
योग
शूल 00:23 (25 दिस॰) तक, फिर गण्ड 20:34 (25 दिस॰) तक
करण
वणिज 12:47 तक, फिर विष्टि 23:10 तक, फिर शकुनि 09:35 (25 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:56
  • राहु काल11:11 – 12:34
  • यमगंड15:19 – 16:41
  • गुलिक काल08:26 – 09:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:03 – 08:26
  • लाभ(शुभ)08:26 – 09:48
  • अमृत(शुभ)09:48 – 11:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:34
  • शुभ(शुभ)12:34 – 13:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:41
  • चर(सामान्य)16:41 – 18:04

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:04 – 19:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:42 – 21:19
  • लाभ(शुभ)21:19 – 22:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:56 – 00:34 (25 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:34 (25 दिस॰) – 02:11 (25 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:11 (25 दिस॰) – 03:49 (25 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:49 (25 दिस॰) – 05:26 (25 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:26 (25 दिस॰) – 07:03 (25 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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