पंचांग 2 जून 2038
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 जून 2038 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:07
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:37
- मास:
- वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1960 · विक्रम (चैत्रादि) 2095
- संवत्सर:
- कालयुक्त (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 05:54 (3 जून) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 07:11 (4 जून) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 13:50 तक, फिर रोहिणी 15:58 (3 जून) तक
- योग
- सुकर्मा 00:25 (3 जून) तक, फिर धृति 00:32 (4 जून) तक
- करण
- चतुष्पद 17:07 तक, फिर नाग 05:54 (3 जून) तक, फिर किंस्तुघ्न 18:35 (3 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:32 – 14:11
- यमगंड07:36 – 09:14
- गुलिक काल10:53 – 12:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)05:57 – 07:36
- अमृत(शुभ)07:36 – 09:14
- काल(वर्जित (परंपरा))09:14 – 10:53
- शुभ(शुभ)10:53 – 12:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:50
- चर(सामान्य)15:50 – 17:29
- लाभ(शुभ)17:29 – 19:07
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:07 – 20:29
- शुभ(शुभ)20:29 – 21:50
- अमृत(शुभ)21:50 – 23:11
- चर(सामान्य)23:11 – 00:32 (3 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:32 (3 जून) – 01:53 (3 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (3 जून) – 03:14 (3 जून)
- लाभ(शुभ)03:14 (3 जून) – 04:36 (3 जून)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:36 (3 जून) – 05:57 (3 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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