पंचांग 3 दिसंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 दिसंबर 2037 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:51
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय03:55 (4 दिस॰)
चंद्रास्त15:12
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कन्या 16:40 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 15:19 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 12:34 (4 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 03:39 (4 दिस॰) तक, फिर स्वाती 01:38 (5 दिस॰) तक
- योग
- सौभाग्य 02:04 (4 दिस॰) तक, फिर शोभन 22:36 (4 दिस॰) तक
- करण
- बालव 15:19 तक, फिर कौलव 01:57 (4 दिस॰) तक, फिर तैतिल 12:34 (4 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
- राहु काल13:47 – 15:10
- यमगंड06:51 – 08:14
- गुलिक काल09:38 – 11:01
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:51 – 08:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:38 – 11:01
- चर(सामान्य)11:01 – 12:24
- लाभ(शुभ)12:24 – 13:47
- अमृत(शुभ)13:47 – 15:10
- काल(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:33
- शुभ(शुभ)16:33 – 17:56
रात
- अमृत(शुभ)17:56 – 19:33
- चर(सामान्य)19:33 – 21:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:47
- काल(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:24 (4 दिस॰)
- लाभ(शुभ)00:24 (4 दिस॰) – 02:01 (4 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:01 (4 दिस॰) – 03:38 (4 दिस॰)
- शुभ(शुभ)03:38 (4 दिस॰) – 05:15 (4 दिस॰)
- अमृत(शुभ)05:15 (4 दिस॰) – 06:52 (4 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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