पंचांग 20 मई 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 मई 2037 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:03
चंद्रोदय10:28
चंद्रास्त23:51
मास:
अधिक ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 07:15 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 05:34 (21 मई) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 03:40 (22 मई) तक
नक्षत्र
पुष्य 03:24 (21 मई) तक, फिर आश्लेषा 02:17 (22 मई) तक
योग
गण्ड 12:34 तक, फिर वृद्धि 10:07 (21 मई) तक
करण
बालव 07:15 तक, फिर कौलव 18:27 तक, फिर तैतिल 05:34 (21 मई) तक, फिर गर 16:39 (21 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:09
  • यमगंड07:37 – 09:15
  • गुलिक काल10:53 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:59 – 07:37
  • अमृत(शुभ)07:37 – 09:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:15 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:47
  • चर(सामान्य)15:47 – 17:25
  • लाभ(शुभ)17:25 – 19:03

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:03 – 20:25
  • शुभ(शुभ)20:25 – 21:47
  • अमृत(शुभ)21:47 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:31 (21 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (21 मई) – 01:53 (21 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (21 मई) – 03:15 (21 मई)
  • लाभ(शुभ)03:15 (21 मई) – 04:37 (21 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:37 (21 मई) – 05:59 (21 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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