पंचांग 31 मार्च 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 मार्च 2037 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय18:55
चंद्रास्तनहीं
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 15:23 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 11:58 (1 अप्रैल) तक
नक्षत्र
हस्त 02:04 (1 अप्रैल) तक, फिर चित्रा 23:36 (1 अप्रैल) तक
योग
ध्रुव 01:26 (1 अप्रैल) तक, फिर व्याघात 21:36 (1 अप्रैल) तक
करण
बव 15:23 तक, फिर बालव 01:38 (1 अप्रैल) तक, फिर कौलव 11:58 (1 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल15:43 – 17:15
  • यमगंड09:34 – 11:06
  • गुलिक काल12:38 – 14:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:29 – 08:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:01 – 09:34
  • चर(सामान्य)09:34 – 11:06
  • लाभ(शुभ)11:06 – 12:38
  • अमृत(शुभ)12:38 – 14:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:48

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:48 – 20:15
  • लाभ(शुभ)20:15 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:10
  • शुभ(शुभ)23:10 – 00:38 (1 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:38 (1 अप्रैल) – 02:05 (1 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)02:05 (1 अप्रैल) – 03:33 (1 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:33 (1 अप्रैल) – 05:01 (1 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:01 (1 अप्रैल) – 06:28 (1 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें