पंचांग 27 जनवरी 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 जनवरी 2037 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय14:22
चंद्रास्त03:41 (28 जन॰)
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1958 · विक्रम (चैत्रादि) 2093
- संवत्सर:
- नल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 08:28 तक, फिर शुक्ल एकादशी 07:05 (28 जन॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 04:59 (29 जन॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 02:20 (28 जन॰) तक, फिर मृगशीर्ष 01:03 (29 जन॰) तक
- योग
- ब्रह्म 20:02 तक, फिर इन्द्र 17:24 (28 जन॰) तक
- करण
- गर 08:28 तक, फिर वणिज 19:52 तक, फिर विष्टि 07:05 (28 जन॰) तक, फिर बव 18:07 (28 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:09
- राहु काल15:36 – 17:01
- यमगंड09:58 – 11:22
- गुलिक काल12:47 – 14:11
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:58
- चर(सामान्य)09:58 – 11:22
- लाभ(शुभ)11:22 – 12:47
- अमृत(शुभ)12:47 – 14:11
- काल(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:36
- शुभ(शुभ)15:36 – 17:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:25
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:25 – 20:01
- लाभ(शुभ)20:01 – 21:36
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:36 – 23:11
- शुभ(शुभ)23:11 – 00:47 (28 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:47 (28 जन॰) – 02:22 (28 जन॰)
- चर(सामान्य)02:22 (28 जन॰) – 03:58 (28 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:58 (28 जन॰) – 05:33 (28 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (28 जन॰) – 07:08 (28 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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