पंचांग 14 मार्च 2036

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 मार्च 2036 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:43
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय20:47
चंद्रास्त08:09
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
संवत्सर:
राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कन्या 21:05 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:20 तक, फिर कृष्ण तृतीया 09:01 (15 मार्च) तक
नक्षत्र
हस्त 09:29 तक, फिर चित्रा 08:50 (15 मार्च) तक
योग
वृद्धि 15:13 तक, फिर ध्रुव 13:06 (15 मार्च) तक
करण
गर 10:20 तक, फिर वणिज 21:36 तक, फिर विष्टि 09:01 (15 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:07
  • राहु काल11:13 – 12:43
  • यमगंड15:43 – 17:14
  • गुलिक काल08:13 – 09:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:43 – 08:13
  • लाभ(शुभ)08:13 – 09:43
  • अमृत(शुभ)09:43 – 11:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:13 – 12:43
  • शुभ(शुभ)12:43 – 14:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • चर(सामान्य)17:14 – 18:44

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:13 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:43 (15 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:43 (15 मार्च) – 02:13 (15 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:13 (15 मार्च) – 03:42 (15 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:42 (15 मार्च) – 05:12 (15 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:12 (15 मार्च) – 06:42 (15 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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