पंचांग 14 फ़रवरी 2036
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 फ़रवरी 2036 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय21:10
चंद्रास्त08:51
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
- संवत्सर:
- राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- सिंह 07:08 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 19:01 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 17:16 (15 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 00:00 (15 फ़र॰) तक, फिर हस्त 23:06 (15 फ़र॰) तक
- योग
- सुकर्मा 11:28 तक, फिर धृति 08:38 (15 फ़र॰) तक
- करण
- वणिज 08:09 तक, फिर विष्टि 19:01 तक, फिर बव 06:04 (15 फ़र॰) तक, फिर बालव 17:16 (15 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल14:15 – 15:41
- यमगंड07:03 – 08:29
- गुलिक काल09:55 – 11:22
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)07:03 – 08:29
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:29 – 09:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:22
- चर(सामान्य)11:22 – 12:48
- लाभ(शुभ)12:48 – 14:15
- अमृत(शुभ)14:15 – 15:41
- काल(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:08
- शुभ(शुभ)17:08 – 18:34
रात
- अमृत(शुभ)18:34 – 20:07
- चर(सामान्य)20:07 – 21:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:41 – 23:15
- काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (15 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)00:48 (15 फ़र॰) – 02:22 (15 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:22 (15 फ़र॰) – 03:55 (15 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)03:55 (15 फ़र॰) – 05:29 (15 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)05:29 (15 फ़र॰) – 07:02 (15 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें