पंचांग 26 सितंबर 2035
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 सितंबर 2035 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय02:09 (27 सित॰)
चंद्रास्त14:29
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
- संवत्सर:
- राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 11:00 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 02:41 (27 सित॰) तक, फिर कृष्ण एकादशी 00:38 (28 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 16:38 तक, फिर पुष्य 15:17 (27 सित॰) तक
- योग
- परिघ 18:28 तक, फिर शिव 15:38 (27 सित॰) तक
- करण
- वणिज 15:45 तक, फिर विष्टि 02:41 (27 सित॰) तक, फिर बव 13:39 (27 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:49परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:25 – 13:56
- यमगंड07:54 – 09:24
- गुलिक काल10:55 – 12:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:24 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:55
- शुभ(शुभ)10:55 – 12:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:26
- चर(सामान्य)15:26 – 16:57
- लाभ(शुभ)16:57 – 18:27
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:27 – 19:57
- शुभ(शुभ)19:57 – 21:26
- अमृत(शुभ)21:26 – 22:56
- चर(सामान्य)22:56 – 00:25 (27 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:25 (27 सित॰) – 01:55 (27 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (27 सित॰) – 03:25 (27 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (27 सित॰) – 04:54 (27 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (27 सित॰) – 06:24 (27 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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