पंचांग 9 नवंबर 2033
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 नवंबर 2033 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:38
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय20:35
चंद्रास्त08:57
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1955 · विक्रम (चैत्रादि) 2090
- संवत्सर:
- प्रमादी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृषभ 18:15 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 16:37 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 14:32 (10 नव॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 07:09 तक, फिर मृगशीर्ष 05:30 (10 नव॰) तक, फिर आर्द्रा 04:33 (11 नव॰) तक
- योग
- शिव 23:51 तक, फिर सिद्ध 21:10 (10 नव॰) तक
- करण
- विष्टि 16:37 तक, फिर बव 03:30 (10 नव॰) तक, फिर बालव 14:32 (10 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:43
- यमगंड08:03 – 09:28
- गुलिक काल10:53 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:38 – 08:03
- अमृत(शुभ)08:03 – 09:28
- काल(वर्जित (परंपरा))09:28 – 10:53
- शुभ(शुभ)10:53 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:33
- लाभ(शुभ)16:33 – 17:58
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:33
- शुभ(शुभ)19:33 – 21:08
- अमृत(शुभ)21:08 – 22:43
- चर(सामान्य)22:43 – 00:18 (10 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (10 नव॰) – 01:53 (10 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (10 नव॰) – 03:28 (10 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:28 (10 नव॰) – 05:03 (10 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:03 (10 नव॰) – 06:38 (10 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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