पंचांग 30 सितंबर 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 सितंबर 2032 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय03:39 (1 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:41
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कर्क 19:09 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 09:30 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 12:01 (1 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 19:09 तक, फिर मघा 22:10 (1 अक्टू॰) तक
योग
सिद्ध 12:22 तक, फिर साध्य 13:19 (1 अक्टू॰) तक
करण
बालव 09:30 तक, फिर कौलव 22:45 तक, फिर तैतिल 12:01 (1 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल13:54 – 15:23
  • यमगंड06:24 – 07:54
  • गुलिक काल09:24 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:24 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:24
  • लाभ(शुभ)12:24 – 13:54
  • अमृत(शुभ)13:54 – 15:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:53
  • शुभ(शुभ)16:53 – 18:23

रात

  • अमृत(शुभ)18:23 – 19:53
  • चर(सामान्य)19:53 – 21:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 22:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:24 (1 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:24 (1 अक्टू॰) – 01:54 (1 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (1 अक्टू॰) – 03:24 (1 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:24 (1 अक्टू॰) – 04:54 (1 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:54 (1 अक्टू॰) – 06:25 (1 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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