पंचांग 29 जून 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 जून 2032 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय00:07 (30 जून)
चंद्रास्त11:49
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ 06:46 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:35 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 18:55 (30 जून) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 12:26 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 11:22 (30 जून) तक
योग
सौभाग्य 22:23 तक, फिर शोभन 20:02 (30 जून) तक
करण
विष्टि 09:36 तक, फिर बव 20:35 तक, फिर बालव 07:41 (30 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
  • राहु काल15:56 – 17:35
  • यमगंड09:19 – 10:58
  • गुलिक काल12:38 – 14:17

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:40 – 09:19
  • चर(सामान्य)09:19 – 10:58
  • लाभ(शुभ)10:58 – 12:38
  • अमृत(शुभ)12:38 – 14:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
  • शुभ(शुभ)15:56 – 17:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:15

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:35
  • लाभ(शुभ)20:35 – 21:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:56 – 23:17
  • शुभ(शुभ)23:17 – 00:38 (30 जून)
  • अमृत(शुभ)00:38 (30 जून) – 01:59 (30 जून)
  • चर(सामान्य)01:59 (30 जून) – 03:19 (30 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:19 (30 जून) – 04:40 (30 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:40 (30 जून) – 06:01 (30 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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