पंचांग 3 अगस्त 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 अगस्त 2031 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:12
सूर्यास्त19:08
चंद्रोदय19:18
चंद्रास्त06:14
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मकर 05:02 (4 अग॰) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 07:15 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 03:34 (4 अग॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:12 (5 अग॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 18:25 तक, फिर धनिष्ठा 15:44 (4 अग॰) तक
योग
आयुष्मान 18:21 तक, फिर सौभाग्य 14:22 (4 अग॰) तक
करण
बव 07:15 तक, फिर बालव 17:23 तक, फिर कौलव 03:34 (4 अग॰) तक, फिर तैतिल 13:50 (4 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल17:31 – 19:08
  • यमगंड12:40 – 14:17
  • गुलिक काल15:54 – 17:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:12 – 07:49
  • चर(सामान्य)07:49 – 09:26
  • लाभ(शुभ)09:26 – 11:03
  • अमृत(शुभ)11:03 – 12:40
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:17
  • शुभ(शुभ)14:17 – 15:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:54 – 17:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:31 – 19:08

रात

  • शुभ(शुभ)19:08 – 20:31
  • अमृत(शुभ)20:31 – 21:54
  • चर(सामान्य)21:54 – 23:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:40 (4 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (4 अग॰) – 02:03 (4 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:03 (4 अग॰) – 03:26 (4 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (4 अग॰) – 04:50 (4 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:50 (4 अग॰) – 06:13 (4 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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