पंचांग 27 नवंबर 2030
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 नवंबर 2030 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय08:45
चंद्रास्त20:14
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
- संवत्सर:
- साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 01:35 (28 नव॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 22:32 (28 नव॰) तक
- नक्षत्र
- मूल 19:10 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 16:44 (28 नव॰) तक
- योग
- धृति 07:36 तक, फिर शूल 03:37 (28 नव॰) तक, फिर गण्ड 23:56 (28 नव॰) तक
- करण
- तैतिल 15:15 तक, फिर गर 01:35 (28 नव॰) तक, फिर वणिज 12:01 (28 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:44परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:22 – 13:45
- यमगंड08:11 – 09:34
- गुलिक काल10:58 – 12:22
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:47 – 08:11
- अमृत(शुभ)08:11 – 09:34
- काल(वर्जित (परंपरा))09:34 – 10:58
- शुभ(शुभ)10:58 – 12:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:09
- चर(सामान्य)15:09 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:09
- अमृत(शुभ)21:09 – 22:45
- चर(सामान्य)22:45 – 00:22 (28 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:22 (28 नव॰) – 01:58 (28 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (28 नव॰) – 03:35 (28 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:35 (28 नव॰) – 05:11 (28 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:11 (28 नव॰) – 06:48 (28 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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