पंचांग 28 अक्टूबर 2030
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 अक्टूबर 2030 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय07:53
चंद्रास्त19:24
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
- संवत्सर:
- साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- तुला 11:28 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 19:22 तक, फिर शुक्ल तृतीया 16:10 (29 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 16:51 तक, फिर अनुराधा 14:23 (29 अक्टू॰) तक
- योग
- आयुष्मान 10:37 तक, फिर सौभाग्य 06:46 (29 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 09:00 तक, फिर कौलव 19:22 तक, फिर तैतिल 05:45 (29 अक्टू॰) तक, फिर गर 16:10 (29 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल07:59 – 09:25
- यमगंड10:51 – 12:18
- गुलिक काल13:44 – 15:11
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:32 – 07:59
- काल(वर्जित (परंपरा))07:59 – 09:25
- शुभ(शुभ)09:25 – 10:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
- चर(सामान्य)13:44 – 15:11
- लाभ(शुभ)15:11 – 16:37
- अमृत(शुभ)16:37 – 18:03
रात
- चर(सामान्य)18:03 – 19:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:37 – 21:11
- काल(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:44
- लाभ(शुभ)22:44 – 00:18 (29 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (29 अक्टू॰) – 01:52 (29 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:52 (29 अक्टू॰) – 03:25 (29 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:25 (29 अक्टू॰) – 04:59 (29 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:59 (29 अक्टू॰) – 06:32 (29 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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