पंचांग 29 जून 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 जून 2030 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय05:23 (30 जून)
चंद्रास्त18:03
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ 21:19 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 00:59 (30 जून) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 03:04 (1 जुल॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:51 तक, फिर मृगशीर्ष 10:43 (30 जून) तक
योग
गण्ड 20:41 तक, फिर वृद्धि 21:27 (30 जून) तक
करण
विष्टि 11:50 तक, फिर शकुनि 00:59 (30 जून) तक, फिर चतुष्पद 14:04 (30 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
  • राहु काल09:19 – 10:58
  • यमगंड14:17 – 15:56
  • गुलिक काल06:01 – 07:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:40
  • शुभ(शुभ)07:40 – 09:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:58
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:38
  • चर(सामान्य)12:38 – 14:17
  • लाभ(शुभ)14:17 – 15:56
  • अमृत(शुभ)15:56 – 17:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:14

रात

  • लाभ(शुभ)19:14 – 20:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:56
  • शुभ(शुभ)21:56 – 23:17
  • अमृत(शुभ)23:17 – 00:38 (30 जून)
  • चर(सामान्य)00:38 (30 जून) – 01:58 (30 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:58 (30 जून) – 03:19 (30 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:19 (30 जून) – 04:40 (30 जून)
  • लाभ(शुभ)04:40 (30 जून) – 06:01 (30 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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