पंचांग 11 जून 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जून 2030 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय14:36
चंद्रास्त02:25 (12 जून)
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कन्या 22:58 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 16:49 तक, फिर शुक्ल एकादशी 14:06 (12 जून) तक
नक्षत्र
हस्त 11:49 तक, फिर चित्रा 10:00 (12 जून) तक
योग
व्यतीपात 07:24 तक, फिर वरीयान 04:19 (12 जून) तक, फिर परिघ 00:50 (13 जून) तक
करण
तैतिल 05:59 तक, फिर गर 16:49 तक, फिर वणिज 03:31 (12 जून) तक, फिर विष्टि 14:06 (12 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 13:00
  • राहु काल15:52 – 17:31
  • यमगंड09:15 – 10:55
  • गुलिक काल12:34 – 14:13

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:57 – 07:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:36 – 09:15
  • चर(सामान्य)09:15 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:34
  • अमृत(शुभ)12:34 – 14:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:52
  • शुभ(शुभ)15:52 – 17:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:31 – 19:10

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:10 – 20:31
  • लाभ(शुभ)20:31 – 21:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:13
  • शुभ(शुभ)23:13 – 00:34 (12 जून)
  • अमृत(शुभ)00:34 (12 जून) – 01:55 (12 जून)
  • चर(सामान्य)01:55 (12 जून) – 03:15 (12 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:15 (12 जून) – 04:36 (12 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:36 (12 जून) – 05:57 (12 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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