पंचांग 21 अप्रैल 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अप्रैल 2030 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:13
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय22:31
चंद्रास्त08:51
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक 02:56 (22 अप्रैल) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 19:03 तक, फिर कृष्ण पंचमी 16:23 (22 अप्रैल) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:56 (22 अप्रैल) तक, फिर मूल 01:14 (23 अप्रैल) तक
योग
वरीयान 15:20 तक, फिर परिघ 11:57 (22 अप्रैल) तक
करण
बव 08:34 तक, फिर बालव 19:03 तक, फिर कौलव 05:39 (22 अप्रैल) तक, फिर तैतिल 16:23 (22 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
  • राहु काल17:18 – 18:53
  • यमगंड12:33 – 14:08
  • गुलिक काल15:43 – 17:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:48
  • चर(सामान्य)07:48 – 09:23
  • लाभ(शुभ)09:23 – 10:58
  • अमृत(शुभ)10:58 – 12:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
  • शुभ(शुभ)14:08 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:53

रात

  • शुभ(शुभ)18:53 – 20:18
  • अमृत(शुभ)20:18 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (22 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:33 (22 अप्रैल) – 01:58 (22 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)01:58 (22 अप्रैल) – 03:23 (22 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:23 (22 अप्रैल) – 04:48 (22 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)04:48 (22 अप्रैल) – 06:13 (22 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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