पंचांग 17 मार्च 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 मार्च 2030 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:41
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय16:32
चंद्रास्त05:15 (18 मार्च)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क 12:22 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 04:09 (18 मार्च) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 02:03 (19 मार्च) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 12:22 तक, फिर मघा 11:24 (18 मार्च) तक
योग
सुकर्मा 13:49 तक, फिर धृति 11:17 (18 मार्च) तक
करण
कौलव 16:58 तक, फिर तैतिल 04:09 (18 मार्च) तक, फिर गर 15:10 (18 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:07
  • राहु काल17:14 – 18:44
  • यमगंड12:43 – 14:13
  • गुलिक काल15:43 – 17:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:41 – 08:11
  • चर(सामान्य)08:11 – 09:42
  • लाभ(शुभ)09:42 – 11:12
  • अमृत(शुभ)11:12 – 12:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:13
  • शुभ(शुभ)14:13 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:44

रात

  • शुभ(शुभ)18:44 – 20:14
  • अमृत(शुभ)20:14 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:42 (18 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:42 (18 मार्च) – 02:12 (18 मार्च)
  • लाभ(शुभ)02:12 (18 मार्च) – 03:41 (18 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:41 (18 मार्च) – 05:11 (18 मार्च)
  • शुभ(शुभ)05:11 (18 मार्च) – 06:40 (18 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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