पंचांग 15 फ़रवरी 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 फ़रवरी 2030 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय15:59
चंद्रास्त05:16 (16 फ़र॰)
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मिथुन 20:22 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 13:38 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 13:43 (16 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 02:33 (16 फ़र॰) तक, फिर पुष्य 02:50 (17 फ़र॰) तक
योग
प्रीति 09:55 तक, फिर आयुष्मान 08:54 (16 फ़र॰) तक
करण
बालव 13:38 तक, फिर कौलव 01:46 (16 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 13:43 (16 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल11:22 – 12:48
  • यमगंड15:41 – 17:08
  • गुलिक काल08:28 – 09:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:02 – 08:28
  • लाभ(शुभ)08:28 – 09:55
  • अमृत(शुभ)09:55 – 11:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:08
  • चर(सामान्य)17:08 – 18:35

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:41
  • लाभ(शुभ)21:41 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (16 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:48 (16 फ़र॰) – 02:21 (16 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:21 (16 फ़र॰) – 03:55 (16 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:55 (16 फ़र॰) – 05:28 (16 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:28 (16 फ़र॰) – 07:01 (16 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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