पंचांग 30 दिसंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 दिसंबर 2029 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय02:58 (31 दिस॰)
चंद्रास्त13:36
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 21:51 तक, फिर कृष्ण एकादशी 19:12 (31 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 08:00 तक, फिर स्वाती 06:11 (31 दिस॰) तक, फिर विशाखा 04:10 (1 जन॰) तक
- योग
- सुकर्मा 03:05 (31 दिस॰) तक, फिर धृति 23:40 (31 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 11:06 तक, फिर विष्टि 21:51 तक, फिर बव 08:33 (31 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
- राहु काल16:45 – 18:08
- यमगंड12:37 – 13:59
- गुलिक काल15:22 – 16:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:28
- चर(सामान्य)08:28 – 09:51
- लाभ(शुभ)09:51 – 11:14
- अमृत(शुभ)11:14 – 12:37
- काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 13:59
- शुभ(शुभ)13:59 – 15:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:08
रात
- शुभ(शुभ)18:08 – 19:45
- अमृत(शुभ)19:45 – 21:22
- चर(सामान्य)21:22 – 23:00
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:37 (31 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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